विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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चिंता क्रोध और शोक से नपुंसकता
अतिप्रचिंतनाश्चैव शोकात्क्रोधाद्भयादपि ।
ईर्ष्यात्कंठात्तथोद्वेगात्समा विंसतिको नरः ॥
जिनको अत्यन्त चिंता हर समय लगी रहती है, जिनको
क्रोध अधिक आता है, जिनको भारी शोक मे पड़ना पड़ता है, जो
किसी कारण से हृदय में भयभीत रहते हैं और जो पराई ईर्षा
में ही लगे रहते हैं इन कारणों से वे पुरुष भी कुछ दिनो मे
नपुसक होजाते हैं ।
अन्य कारणों से नपुंसकता
वाल्यावस्था से वीर्य के नष्ट करने से जवानी में वेश्याग-
मन से, हस्त मैथुन से, निर्वलता की दशा में अधिक उपवास करने
से, कम खाने से और समय कुसमय खाने से, समय कुसमय प्रसंग
से शरीर के वल वीर्य नष्ट होकर मनुष्य को कुछ दिनों मे नपुसक
वना देते हैं ।
ऊपर लिखे कारणों से तो अच्छे पुरुष जिनके शरीर मे पूर्व
से नपुंसकता का कोई लक्षण नही होता है, अपनी ही अनियमित
क्रियाओ से नपुंसक हो जाते हैं। दूसरे नपुंसक वे होते हैं जो
माता पिता के दोष से जन्म से ही नपुसक पैदा होते हैं । ऐसे
नपुंसकों के विषय में आगे लिखा जाता है जो कई प्रकार के