विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७८ आनन्द मन्दिर
वृद्धावस्था की नपुंसकता
जघन्यमध्यप्रवरं वयस्त्रिविध मुच्यते ।
अथ च प्रवरे शुक्रं प्रायशः क्षीयते नृणाम् ॥
वृद्धावस्था मे मनुष्यों का वीर्य क्षीण हो जाता है। मनुष्य की
अवस्था तीन प्रकार की है बुढ़ापे में वीर्य क्षीण होने से मनुष्य
नपुसक हो जाता है ।
रसादीनां संक्षयाच्च तथैवावृष्य सेवनात् ।
बलवर्णेन्द्रियाणां च क्रमेणैव परिक्षयात् ॥
बुढापे में पुरुष के शरीर मे रक्त मांस बल वीर्य बनाने वाले
जो रसादि हैं उनके क्षय होने से तथा जो पुरुष रसादिको को
अधिक बनाने वाले, जिनसे बल वीर्य की वृद्धि और पुष्टि होती है
ऐसे पदार्थों का सेवन नहीं करता अथवा उसे ये पदार्थ खाने को
मिलते ही नही परन्तु विषय वासना में लिप्त रहता है, प्रसग
करने मे जिसने कमी नही की उसके क्रमशः बल वीर्य वर्ण और
इन्द्रियों के क्षीण होने से तथा परिश्रम करते रहने और बलवर्द्धक
पदार्थ खाने को न मिलने से वह मनुष्य बुढापा आते ही शीघ्र ही
नपुँसक होजाता है। फिर बुढ़ापे मे वह अत्यन्त दुर्बल तनक्षीण
बलहीन हो जाता है, शरीर की दशा पलट जाती है, उसे रोग
शीघ्रही घेर लेते हैं। यह बुढ़ापे की नपुसकता है ।