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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 423

२८० आनन्द मन्दिर
होते हैं। जिस प्रकार पुरुप नपुसक होते हैं इसी प्रकार स्त्री भी
नपुसक होती हैं उनका वर्णन भी इस अध्याय मे आगे किया।
जायगा।
नपुंसक होने का कारण
अतएवचशुक्रस्य बाहुल्याज्जायते पुमान् ।
रक्तस्यस्त्रीतयोः साम्ये क्लीवःस्यात् ॥
अर्थात्—पीछे कहे हुए कारणो से अर्थात् पुरुप का वीर्य
अधिक होने से पुत्र और स्त्री का रज अविक होने से कन्या गर्भ में
आती है और स्त्री पुरुप दोनो का रज वीर्य वरावर होने से
नपुसक सन्तान उत्पन्न होती है।
आरोग्य और बलिष्ट सन्तान
स्त्रीपुंसयोस्तुसंयोगेयद्यादौविसृजेत्पुमान् ।
शुक्रं ततः पुमान्वीरोजायते बलवान् दृढः ॥
अथचेद्बनितापूर्वं विसृजेद्रक्तसंयुतम् ।
ततोरूपान्विता कन्या जायते दृढसंहता ॥
अर्थात्—स्त्री पुरुप के सयोग में यदि प्रथम पुरुप का वीर्य
स्व