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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २७७
जिसका रज स्खलित होने मे बहुत देरी लगे और जो ऋतु से
हुई हो ऐसी स्त्री से प्रसंग करते हैं वे पुरुष कुछ दिनो मे नपुसक
हो जाते हैं ।
दुर्गंधां दुष्टयोनिं च तथैव च परिश्रुताम् ।
नरस्य प्रमदां मोहादतिहर्षात्प्रगच्छत ॥
वैद्यकशास्त्र बतलाता है कि जो पुरुष ऐसी स्त्री से प्रसंग करता
है जिसकी योनि से दुर्गंधि आती हो । जिस स्त्री के गरमी, सुजाक
रज विकार अथवा प्रदर सोमरोग हो ऐसी स्त्री से गमन करता है
अथवा जिसकी योनि किसी भी रोग से दूषित हो गीली रहती हो
या नियम के विरुद्ध कुआसन उलटे सीधे हो मूर्खता से नियम
विरुद्ध मैथुन करता है वह पुरुष भी नपुंसक हो जाता है ।
चतुष्पदाभिगमनाच्छ्लेफसरचाभिघाततः !
अधावनाद्वा मेढ्रस्य शस्त्रादंत नख क्षतात् ॥
इसका अर्थ यह होता है कि जो अज्ञानी मूर्ख पुरुष पशुओं
के साथ प्रसंग करता है वह शीघ्र ही कुछ दिनो मे नपुसक हो जाता
है और जिसकी इन्द्री मे चोट लगी हो, जो इन्द्री को साफ नहीं
करता, जिसकी इन्द्री मे किसी कारण से शस्त्र लगा हो, नाखून
लगकर घाव हो जाने से और अत्यन्त प्रसंग करने से वीर्य
नष्ट होकर इन्द्री की नसें कमजोर होगई हो वह पुरुष नपुसक
होजाता है ।