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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 409

२७० आनन्द मन्दिर
पूछा-आपकी भौजाई अभी है या नहीं ? उसने कहा भौजाई अभी
जिन्दा है और भौजाई का अब यह हाल है कि जब वह गर्भवती
होजाती है तो जब तक बालक पैदा नही होता तब तक बिलकुल
अच्छी रहती है। नाम मात्र को भी पागल पन नहीं रहता,
मेरी भौजाई बड़ी चतुर और गृहस्थी के कामकाज मे परिश्रम
करने वाली पढ़ी लिखी स्त्री है। गर्भावस्था मे सब काम ठीक करती
है। बालक होते ही कुछ दिन बाद फिर पागल होजाती है। बच्चो
की परवरिश के लिये गाय का दूध पिलाया जाता है उसके पास
तक बच्चो को नही जाने दिया जाता।
मैंने कहा इसी प्रकार यह तुम्हारी लड़की भी होगी। इसका
आराम होना तो कठिन है।
इसप्रकार के सैकड़ो उदाहरण मेरे देखने मे आये हैं क्योकि
सभी प्रकार की स्त्रियां रोगी निरोगी प्रतिदिन आया करती हैं।
इस विषय को अधिक उदाहरण देकर बढ़ाने से पुस्तक बहुत बड़ी
होजायगी। इस विषय मे कहना यही है कि माता पिता के शरीर
मे किसी प्रकार का रोग न हो और दोनो प्रसन्न चित्त हो और
संभोग के समय दोनो की प्रबल इच्छा सम्भोग करने की हो
तभी सन्तान आरोग्य होती है। रोगी माता पिता की सन्तान
भी रोगी होती है। गर्भ रह जाने पर भी गर्भावस्था मे गर्भवती
को बडी सावधानी से रहना चाहिये। गर्भावस्था मे भी जैसे आचार
व्यवहार किये जाते हैं उसका प्रभाव सन्तान पर पड़ता है। सन्तान
के उत्पन्न होने तक माता के विचारो का असर सन्तान पर पड़ता है।