विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 410, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र २७१
सन्तान पर माता पिता के रोगों का प्रभाव
जिस प्रकार गर्भावस्था में गर्भवती के आचार विचार तथा
अन्य कामो का प्रभाव सन्तान पर पडता है उसी प्रकार माता
पिता के रोगो का भी प्रभाव सन्तान पर पड़ता है। यह प्रभाव
ऐसा भयंकर होता है कि माता पिता की अज्ञानता और मुर्खता
से सन्तान का जीवन नष्ट होजाता है। सन्तान जीवन पर्यन्त कष्ट
भोगती है और बहुतेरे बच्चे गर्भ मे ही तथा उत्पन्न होते ही
काल का कलेवा बनजाते हैं।
शुद्ध रज वीर्य से उत्तम सन्तान
शुद्ध रज वीर्य से उत्तम और आरोग्य तथा दीर्घजीवी
सन्तान उत्पन्न होती है और दूषित तथा रोगी रज वीर्य से अनेक
दोषो वाली तथा रोगी सन्तान उत्पन्न होती है। इस कारण
यहां मै शुद्ध रज वीर्य और रज क्या है, वीर्य क्या है, स्त्री
और पुरुष के रजवीर्य तथा जननेन्द्रियो मे किस प्रकार रोग
उत्पन्न होते है और उनका प्रभाव सन्तान पर कैसा पडता है
इस विषय को प्रसगानुसार लिखूगी।
सन्तान होने में बालक रोग
वीर्य को अधिक व्यय करने से प्रमेह रोग उत्पन्न होता है।
जो अज्ञानी पुरुष वाल्यावस्था मे कुसंगति मे पड़कर अपने वीर्य