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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 408

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २६६
परन्तु उसकी जड़ नहीं जावेगी। कुछ न कुछ शिकायत कान की
इसे उम्र भर रहेगी। मैंने दवा बतला दी और कह दिया
कि अधिक दिन तक इलाज करने से फायदा होगा। वह स्त्री दवा
लेकर अपने घर चलीगई।
एक स्त्री मेरे पास इलाज के लिये आई उसकी एक लड़की
जिसकी अवस्था ६, साल की थी कुछ कुछ पागल होगई थी
उसी लड़की के इलाज के लिये वह स्त्री मेरे पास आई थी, मैंने
उस लडकी का हाल पूछा कि इसकी यह दशा कितने दिन से
है ? उस स्त्री ने कहा कि यह कुछ सनक मिजाज की कई वर्ष से
मालूम होती थी अब जिस प्रकार बडी होती जाती है वैसे ही इसका
मिजाज सनकी होता जाता है। मैने उस स्त्री से पूछा कि जब
यह लडकी गर्भ मे थी उस समय आपके यहां कोई सनकी मिजाज
का मनुष्य तो नही था ? उस स्त्री ने कहा, मेरी भौजाई पागल थी
जब मै गर्भवती हुई तब मेरे पति ने मुझे मेरे पिता के यहां भेज-
दिया। मै गर्भावस्था मे बराबर पिता के यहां रहीं और वही यह
लड़की पैदा हुई।
मेरी भौजाई पागल थी मै उसे खाना खिलाती कपडे पहिनाती।
वह कपड़े उतार कर फेंक देती थी तो मैं बार बार कपड़े पहिनाती
थी उसकी सेवा करती थी। वह दस पन्द्रह दिन को कभी कभी
अच्छी भी होजाती थी।
मैंने कहा—यही कारण इस लडकी के सनकी होने का है
इसका कोई इलाज नहीं है इसका आराम होना कठिन है। मैंने