विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६८ आनन्द मन्दिर
पास रहने के लिये घर मे नही थी । मेरे पति दफ्तर चले जाते
थे यह मेरे पास हर वक्त बैठी रहती थी ।
मैंने उस स्त्री से कहा, अब गर्भ की दशा मे कभी इसे अपने
पास मत रखना नही तो अब जो बालक होगा वह भी ऐसा ही
काला कलूटा बदशक्ल इसी लडकी की तरह होगा, वह स्त्री
हंसने लगी और बोली—देवी जी ! मुझे यह बात मालूम न थी ।
एक और दूसरी स्त्री मेरे पास इलाज के लिये आईँ । उसके
लड़के का कान बहता था । लडके की अवस्था सात आठ महीने
की थी । मैने उससे पूछा, इसका कान कब से बहता है क्योकि
कान से सवाद आता है ? उस स्त्री ने कहा, जब से यह पैदा हुआ
है इसी तरह कान से मवाद आता है। मैंने उससे पूछा, जब यह
गर्भ मे था तब आपके कान मे कोई शिकायत तो नही थी ? उस
स्त्री ने कहा, जब यह पैदा नही हुआ था तब मेरे कान मे फुड़िया
निकली थी, कान बहने लगा था । यह शिकायत मुझे कई महीने
तक रही । जब यह गर्भ मे था तब भी कई महीने तक कान मे
तकलीफ रही, डाक्टरी इलाज होता रहा। गर्भावस्था मे भी पिच-
कारी से कान धोया जाता था, फिर अच्छा होगया । अब मुझे
जब से यह पैदा हुआ है कान की कोई शिकायत नही है ।
मैने उस स्त्री से कहा, बस यही बात है जब यह गर्भ मे था
तब आपका कान बहता था बल्कि गर्भ रहने के पहिले ही आपके
कान मे शिकायत थी इसीलिये वही असर लड़के मे आगया
है । इस लड़के का कान बहना बडी कठिनाई से दूर तो होजावेगा