विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६६ आनन्द मन्दिर
प्रेम मे एक बड़ी भारी विचित्रता है, प्रेम का बड़ा भारी
महत्व है। यह बात नही है कि सुन्दर स्त्री हो तभी पति का उस
पर प्रेम हो तथा सुन्दर पति हो तभी पत्नी प्रेम करे। जिस प्रेम
मे रंग रूप का भेद भाव रखकर प्रेम होता है वह प्रेम नही
कहा जा सकता ।
ऐसा स्वार्थी प्रेम, प्रेम नही है। वह स्वार्थ का ही प्रेम है।
इसलिये ऐसे दम्पति जो केवल सुन्दरता का विचार करके प्रेम
करते हैं वे महा मूर्ख हैं। उनकी सन्तान सुन्दर कदापि नही हो
सकती । सच्चे प्रेम से पति पत्नी का हृदय एक हो जाता है।
विचार एक हो जाते हैं। इस प्रकार परस्पर प्रेम करने वाले
दम्पति सुन्दर सन्तान उत्पन्न करते हैं।
गर्भाधान के समय दाम्पत्य प्रेम का बड़ा ही सच्चा प्रभाव
पड़ता है इसी से रूपवान गुणवान सन्तान उत्पन्न होती है।
किसी की पत्नी यदि रूपवती न हो अथवा किसी का पति सुन्दर
न हो तो उसे रूपवान, गुणवान, सन्तान उत्पन्न करने की
निराशा नही होनी चाहिये । आपस मे सच्चा प्रेम होना चाहिये
पति को अपनी कुरूप स्त्री को सुन्दर रूपवती समझ कर प्रेम
करना चाहिये और उसी प्रकार पत्नी को भी अपने कुरूप पति
को सर्व श्रेष्ठ रूपवान समझ कर प्रेम करना चाहिये ।
प्रेम के प्रभाव से कुरूप पति पत्नियो के भी सुन्दर गुणवान
सन्तान हो सकती है और प्रेम न होने से रूपवान गुणवान
दम्पति के भी कुरूप और मूर्ख सन्तान उत्पन्न होती है। इस