विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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बाद गर्भाशय का मुख बन्द होजाने पर संभोग होने से भी गर्भ
नहीं रहता ।
वैद्यकशास्त्र बतलाता है:—
तत्र स्त्री पुंसयोः संयोगेतेजः शरीराद्वायुरुदीरयति ।
ततस्तेजोनिलसन्निपाताच्छुक्रंच्युतं योनिमभि-
प्रतिपद्यते संसृज्यतेचार्त्तवेन ॥
अर्थात्—स्त्री पुरुष के संयोग मे आपस के प्रेम सम्पादन
करने और सच्चे प्रेम मे मग्न हो आनन्दित होकर सभोग
करने से स्त्री पुरुष दोनों की इन्द्री के आपस मे संघर्षण के
द्वारा उत्पन्न हुई ऊष्मा (गर्मी) से वायु शरीर से उठता है उस
रगड़ की गरमी के तेज से पुरुष का वीर्य पतला होकर वायु की
सहायता से अपने स्थान से चलकर गर्भाशय के मुख मे गिरकर
गर्भाशय मे जाकर स्त्री के आर्त्तव मे मिल जाता है । इस प्रकार
पुरुष का वीर्य स्त्री के आर्त्तव मे मिलने से गर्भरूप धारण करता है।
सन्तान पर दाम्पत्य प्रेम का प्रभाव
सुन्दर और हृष्ट पुष्ट सन्तान उत्पन्न करने के लिये पति पत्नी
का प्रेम बड़ा भारी कारण है, जादू कैसा असर रखता है। परन्तु
यह प्रेम सच्चा होना चाहिये। सच्चा प्रेम सुन्दर रूप रंग पर
निर्भर नहीं है। सौन्दर्य कुछ और है प्रेम कुछ और। कुरूप पत्नी के
भी सुन्दर सन्तान होती देखी जाती है । सब विचारो की बात है ।