विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसती ने पिता से जाकर नमस्कार किया फिर चारों ओर देखा तो
यज्ञ में सब देवताओं के भाग थे पर शिव जी का भाग न था ।
सती को देखते ही राजा दक्ष की आंखे सती के ऊपर क्रोध से
लाल होगईं और वे कर्कश स्वर से बोले—सती ! तुझे किसने
बुलाया, तू यहां किस के बुलाने से आई है ?
सती पिता की ऐसी क्रोध युक्त वाणी सुनकर चकित रहगईं
उनको ऐसी आशा स्वप्न में भी न थी उनके हृदय मे पिता के
कठोर वचन वाण की समान लगे और वे दुःखित हो बोलीं
"पिता जी मुझे बुलाया तो किसी ने नहीं परन्तु मैं माता पिता के
स्नेह के कारण स्वयं चली आई क्योंकि मैंने बहुत दिनो से अपनी
प्यारी माता और आपको देखा नहीं था। पिताजी ! आपने मिलने
की बहुत दिनों से मेरी उत्कण्ठा थी, मैंने क्या अपराध किया है
जो आपने अपनी इस प्यारी पुत्री को भुला दिया" ?
"पिताजी ! आप चाहे मुझे भुलादे परन्तु मैं आपकी पुत्री हूं
आपका जो वात्सल्य प्रेम मुझपर रहा है उसे मै कभी स्वप्न मे भी
नही भूल सकती ।"
सती का इस प्रकार पिता से वार्तालाप सुनकर यज्ञशाला
में बैठे हुए सभी ऋषि मुनि बड़े ध्यान और आश्चर्य मे सती की
ओर देखने लगे जिसका हाथ आहुति देने को उठा था वह वैसा,
ही रह गया। सभी अपने अपने कार्य को भुलाकर सती की नम्रता
भरी मधुर वाणी सुनने लगे ।
सती की इस प्रकार की नम्रता युक्त विनय से भी राजा दक्ष
पर कुछ प्रभाव नहीं पड़ा। वे सती से कहने लगे—तेरा यह वहाना