विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ भूमिका
"तुम्हें यज्ञ में तुम्हारे पिता ने नही बुलाया इस लिये तुम्हारी
माता ने अन्न जल त्याग दिया है और वे बडी दुःखी हैं" ।
नारद जी के कहने के अनुसार सती ने माता का दुःख
सुनकर जाना ही उचित समझा, इस लिये शिवजी की बात पर
कुछ विशेष ध्यान नही दिया ।
सती अपने पिता के यहा पहुंच गईं। घर में सती की माता
अन्न जल त्याग कर सती के लिये दुःखित पडी रो रही थी ।
माता की यह दशा देखकर सती को भी बडा दुःख हुआ । माता
के निकट जाकर सती ने कहा "माता मैं आगई" ।
सती की आवाज माता के कानो मे पहुची और वह सुनते
ही उठी, सती को हृदय से लगा लिया, माता पुत्री के स्नेह का
प्रेम सागर उमड पडा । दोनों परस्पर हृदय से लगकर रोने
लगीं । माता से मिलकर सती ने पिता से मिलने की इच्छा
प्रकट की । माता ने कहा—नही ! बेटी पिता से इस समय
मिलना उचित नही है क्योकि वे इस समय यज्ञशाला मे हैं। ऐसे
समय वहा तुम्हारा जाना मै भला नही समझती ।
सती को इस बात का बड़ा दुःख था कि पिता ने मुझे
निमंत्रण क्यो नही दिया इसलिये वह पिता से इस बात का
उलाहना देने की धुन मे थी इस कारण उसने एक न सुनी । वह
यज्ञशाला मे पिता के पास पहुच गई ।
सती को देखकर यज्ञशाला मे बैठे हुए सभी ऋषि मुनि
आदिको ने सती को पिता के पास जाने के लिये रास्ता दे दिया