विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६० आनन्द मन्दिर
चाहिये । पति पत्नी दोनो के विचार उत्तम सन्तान उत्पन्न करने के
होने चाहिये । पति पत्नी के मुह को और पत्नी पति के मुह को ध्यान
पूर्वक वडे स्नेह और प्यार से देखे ।
एक दूसरे को प्यार की दृष्टि से देखने से मग्न होजावे
संसार की अन्य सब बाते चिन्ता शोक इत्यादि भूल जावे ।
सम्भोग के समय कुछ मूर्खों का मत है जो आयुर्वेद के नियमों
को न जानकर मनगढ़त बाते पुस्तको मे लिख डालते हैं और
पाठको को धोखे मे डालते हैं। वे लिखते हैं—
“प्रसग के समय अपने मन को पुरुष कही जंगलो में
लेजाकर भटकने दे अथवा बन्दर बडा चचल जीव है अपने मन
मे सम्भोग करते वक्त किसी बन्दर का ध्यान करे कि एक बन्दर
किसी वृक्ष पर बैठा इधर उधर वृक्ष की शाखाओ पर कूद रहा है
अथवा इसी प्रकार के अन्य खिलाड़ी चंचल जीवो मे ध्यान
लगादेवे या किसी ऐसी बात को विचारने लगजावे कि जिसमे
चित्त उलझ जावे । इस प्रकार चित्त को स्त्री प्रसग से हटा कर
कही दूसरी जगह फंसा देने से पुरुष जल्दी स्खलित नही होता”।
पाठको ! देखा आपने पुस्तक लेखको की बुद्धिमानी और
मनगढ़ंत कामशास्त्र ! उन्हे अभी इस बात की कुछ भी खबर नही
है कि संभोग के समय पुरुष के जैसे विचार होगे वैसे ही विचार
और आकृति वाला बालक उत्पन्न होगा । भला विचार तो कीजिये
ऐसी बुद्धिमानी को बलिहारी है। फिर भला सन्तान बन्दर प्रकृति
की न हो तो क्या हो । सन्तान मूर्ख न हो तो क्या हो ! क्योकि