विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 395, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ें२५८ आनन्द मन्दिर
ठीक ठीक होजाती है, औषधिया पारसल से भेज दी जाती हैं इस
प्रकार पुरुष रोगी भी आराम होजाते हैं।
जिस प्रकार उत्तम खेती के लिये पहिले खेत का उत्तम बना-
लेना अत्यन्त आवश्यक है उसी प्रकार उत्तम सन्तान उत्पन्न करने
के लिये गर्भाधान क्रिया के पहिले स्त्री रूपी खेत को उत्तम
(आरोग्य) बना लेने की आवश्यकता है अर्थात् रोगी स्त्री को
आरोग्य कर शुद्ध आर्तव (रज) की आवश्यकता है।
पुरुष दोष तथा स्त्रियों के आहार विहार
के अनियम से उत्पन्न होने वाले
स्त्री रोग
पुरुषो की अज्ञानता असावधानी और विषय लोलुपता के
कारण स्त्रियो के शरीर मे नाना प्रकार के रोग उत्पन्न होजाते हैं
इनमे से अनियम और अधिक स्त्री प्रसंग से उत्पन्न होने वाले
रोगो की संख्या अधिक है, स्त्री रोगो मे ऋतु का अनियम होना
सबसे बड़ा रोग है क्योकि इससे ही स्त्रियो मे अन्य अनेक प्रकार
के भयकर रोग उत्पन्न होजाते हैं।
स्त्री पुरुष दोनो आरोग्य हो तो आयुर्वेद के अनुसार उत्तम
सन्तान उत्पन्न करने के लिये नियम पूर्वक जैसा कि आयुर्वेद
बतलाता है गर्भाधान क्रिया अर्थात् स्त्री सम्भोग करना चाहिये।