विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र २५५
शूलकासज्वर श्वासकार्श्यपांड्वामयक्षया ।
अतिव्यवायाज्जायंते रोगाश्चाक्षेपकादयः ॥
अर्थात् अधिक मैथुन करने से शूलरोग, खांसी, ज्वर, श्वास
रोग, दुर्बलता, पांडुरोग और सब रोगो का दादा क्षय (तपेदिक)
और अनेक प्रकार के वात सम्बन्धी रोग उत्पन्न होते हैं और
इन रोगो के कारण और भी भयकर रोग उत्पन्न होजाते हैं। क्षय
(तपेदिक) ही एक ऐसा रोग है कि विना प्राणनाश किये
पीछा नहीं छोड़ता । यही कारण है कि हमारे देश मे तपेदिक
अधिक होता है यह असाध्य रोग है जो रोग युवको को ही
अधिक होता है। क्षय रोग से ग्रसित अधिकतर स्त्रियां देखी जाती
हैं क्योंकि क्षय रोग वाली स्त्रियां भी मेरे पास अधिक आती हैं
और चिट्ठियां भी इस प्रकार के रोगी स्त्री पुरुषों की अधिक आती
हैं परन्तु क्षयी रोगी के ठहराने के लिये मेरे पास कोई उत्तम स्थान
नहीं है इसलिये ऐसी रोगी स्त्रिया ठहराई नहीं जाती ।
रतिक्रिया विज्ञान और उत्तम सन्तान
वेद और धर्मशास्त्रों से दाम्पत्य प्रेम और सन्तान के लिये
रतिक्रिया करने का नियम पीछे लिखा जा चुका है। दाम्पत्य प्रेम का
इतिहास और महत्व मे शिवजी, श्रीकृष्ण और श्रीरामचन्द्र तथा
महाराजा रामचन्द्र के बाबा (दशरथ के बाप) का दाम्पत्य प्रेम
सचित्र लिखा जा चुका है। अब यहां आयुर्वेद से गर्भाधान क्रिया
और उत्तम सन्तान उत्पन्न करने की विधि बतलाई जाती है ।