विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५६ आनन्द मन्दिर
जिस प्रकार उत्तम फल अन्न आदि की उत्पत्ति की उत्तमता
के लिये उत्तम खेत और उत्तम बीज की आवश्यकता होती है इसी
प्रकार वल्कि उससे भी अधिक उत्तम सन्तान उत्पन्न करने के लिये
उत्तम खेत रूपी खी का रज और बीज रूपी पुरुप को वीर्य की
अत्यन्त आवश्यकता हुआ करती है।
जिस प्रकार खेत मे बीज वोने के कुछ दिन पहिले से ही
किसान खेत को ठीक बनाता है और उसमें खाद आदि उत्तम
अन्न उत्पन्न होने के लिये डालता है और जब खेत ठीक हो जाता है
तब उत्तम बीज जिसमें कीडे न लगे हों घुना सड़ा सूखा न हो
अर्थात् किसी प्रकार की खराबी न हो ऐसा चीज बोता है। बीज
वो देने पर भी उसका अनेक प्रकार से उत्तम होने का उपाय
करता है और बीज वो देने पर तथा पौधा निकल आने पर भी
अनेक प्रकार की बाधाएं होती हैं उनसे भी पौधे की रक्षा करता है।
जो किसान मूर्खता अथवा आलस्यवश खेत वोने के र्फ ले
' इन बातों का ध्यान नही रखता वह सिवाय पछताने के और
कुछ नही कर सकता इसी प्रकार जो पुरुप उत्तम सन्तान उत्पन्न
करने का पहिले से ही ध्यान नही