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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 378

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २४५


हैं कि "आपकी भेजी हुई औषधि आई, पति जी सेवन तो कर
रहे हैं परन्तु ब्रह्मचर्य से रहना नही चाहते। एक सप्ताह भी ब्रह्म-
चर्य से रहना उन्हे कठिन होरहा है। मुझे भी पति के इस स्वभाव
से बड़ा कष्ट होता है। मैं औषधि खारही हूं दस पांच दिन को
रोग कम होजाता है फिर पति के कारण बढ़जाता है" इस प्रकार
के अनेक पत्र स्त्रियो के आया करते हैं। जो पति पत्नी पथ्य से
ब्रह्मचर्य से औषधियो का सेवन करते हैं उनके रोग दूर होजाते
हैं। वे तन्दुरुस्त हो जाती हैं।

सैंकड़ा पीछे निन्यानवे पुरुष रोगी हैं

जो शीघ्रपात, स्वप्रदोष, सिथिलता और नपुंसकता आदि रोगों
से ग्रसित हैं। जो स्त्री का स्पर्श करते ही स्वयं स्खलित होजाते हैं,
इसका प्रमाण यह है कि वैद्यो और हकीमो के यहां जाकर पता
लगाइये। इस प्रकार के कितने रोगी जाते हैं और धातुपुष्ट की
औषधियां शीघ्रपात और नपुंसकता आदि की दवाइयां खाते हैं.
तिला आदि बेचने वाले नोटिसवाजो के यहां जाकर पता लगाइये
तो मालूम होगा कि सैकड़ा पीछे निन्यानवे पुरुष शीघ्रपात और
स्वप्रदोष आदि वीर्य विकार की औषधियो के लिए पत्र भेजते हैं।

वीर्यदोष वाले रोगियों के पत्र

मेरे पास २५ पच्चीस वर्षों मे लाखों ही पुरुषों के पत्र वीर्य
दोष की औषधियो के लिये आये और प्रतिदिन पचीसो आते हैं