विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४४ आनन्द मन्दिर
हैं। लोग वैद्य के पास जाकर असल रोग को कभी प्रकट नही
करते और यह कहते हैं कि मुझे जोफ जिगर है, अथवा प्रमेह
है, आंखे कमजोर है, दर्द शिर है, मैं दुर्बल होता जाता
हू। वैद्य या डाक्टर उनके कथनानुसार इन्ही रोगों का इलाज
करने लगते हैं । मूल कारण हस्तक्रिया अथवा बहुमैथुन
प्रकृति के विरुद्ध विषय अथवा अन्य बुराइया दूर नहीं की जाती
हैं। सम्भव है रोगी इस महा हानिकारक व्यसन के प्रभाव को
न जानता हो किन्तु यह सम्पूर्ण रोगों का घर है। अस्तु रोगी
को चाहिये कि अपना पूरा हाल सकोच न करके वैद्य या हकीम
से कह दे और चिकित्सक को चाहिये कि अच्छी तरह खोज
कर (पूछ कर) रोगो के मूल कारण को दूर करे ।
पुरुष रोगियों के विषय में मेरा अनुभव
मेरा २५ पच्चीस वर्ष का अनुभव है मैने लाखों रोगी स्त्रियो
की चिकित्सा करके और स्त्रियो द्वारा उनके पुरुषो की चिकित्सा
करके तथा पुरुष रोगियों के पत्रों से पारसल द्वारा औषधियों
से चिकित्सा करके अनुभव प्राप्त किया है कि पुरुष रोग-ग्रसित
रहने पर भी ब्रह्मचर्य से नही रहते, औषधियां पथ्य से रहकर
सेवन करना उन्हे वड़ा कठिन मालूम होता है। रोग चाहे बढ
क्यो न जावे परन्तु ब्रह्मचर्य से दो चार महीने भी नही रह
सक्ते ।
स्त्रियों के प्रतिदिन मेरे पास इस विषय के पत्र आया करते