सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 376, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 376

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २४३
भी हाथ धो बैठते हैं और मुर्दा बन जाते हैं। “मर्ज बढ़ता गया
ज्यों ज्यो दवा की' की कहावत ठीक हो जाती है। यदि वे स्तम्भन
वटी और तिला आदि का सेवन न करके साधारण औषधियां
खाते हुए ब्रह्मचर्य से रहे तो यह निश्चय बात है कि ब्रह्मचर्य से
रहने से ही उनकी शिकायते दूर हो जायें। मेरे पास ऐसी स्त्रियो की
बीसो चिट्ठियाँ प्रतिदिन आया करती हैं कि जिनके पतियो को
तिला आदि की जरूरत है परन्तु मै उन्हें इनकार लिख देती हूँ
कि ऐसी औषधियों का बेचना महा मूर्खता है और लोगों को
धोखे में डालकर उनकी रही सही शारीरिक दशा और भी
बिगाटना है। क्योंकि सबको वे औषधिया फायदा नहीं करती ।
मेरी जो आज़मूदा दवाइया हैं जिनको उनसे फायदा हो सकता है
वे आगे लिखूगी।
लोग अपनी पूरी व्यवस्था न तो पत्र मे लिखते हैं न वैद्य
से कहते हैं फिर कैसे ठीक ओषधि फायदा कर सके, जरा
कमजोरी शरीर या नसों मे देखी बस तिला और स्तम्भनवटी
नोटिस में देखकर मंगाली, चाहे वह फायदा करे या नुक्सान,
इस बात का विचार नहीं करते ।
ऐसे पुरुषो की स्त्रिया जब मेरे पास आती हैं तो अपना
हाल तो कह देती हैं परन्तु पति का हाल बहुत पूछने पर नीचा
शिर करके मुझ से अपनी दुःख कथा कहती हैं तो भला वे पुरुष
वैद्य से कैसे कह सकती हैं। पुरुषो का भी यही हाल होगा, वैद्य
को पूरा हाल अपनी मुर्खता का न बता सके तो बडी मूर्खता