विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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की कमजोरी, श्वास, दर्द गुर्दा, दर्द जिगर, कब्ज (कोष्ठ
बद्धता) मन्दाग्नि, प्रमेह, दुर्बलता, चेहरे पर बेरौनकी, सुस्ती,
उदासी, सन्तान का न होना, चित्त की भ्रान्ति, दर्द सिर और
जुकाम, नजला, मूत्राशय, आमाशय, हृदय, सिर मस्तिष्क यकृत
तथा प्लीहा की कमजोरी, गठिया, भ्रम इत्यादि रोग प्राय आ
कर दबाते हैं। यह भी पूरे तौर से ध्यान मे रखना चाहिये कि पृथक
पृथक प्रकृतियो पर विपरीत तथा अधिक मैथुन का अलग २
दुष्परिणाम होता है। यह ऊपर लिखे रोगो वाले हजारो रोगी
पुरुषों की स्त्रियो का इलाज करने से मुझे अनुभव हुआ है। ऐसे
बहुत से पुरुष हैं कि लगातार वर्षों विपरीत मैथुन अथवा बहु
मैथुन करते हैं परन्तु उनको इतनी हानि नही पहुँचती कि
जितनी दो चार मास नियम विरुद्ध करनेवाले को पहुँचती है।
ऐसे पुरुष भी बहुत है कि जिन्होंने दो चार बार नियम विरुद्ध
विषय किया था उतने ही बिगाड़ से वे स्त्री प्रसंग के योग्य न
रहे। जिन लोगो के पट्ठे ( स्नायु ) कमजोर होते हैं उन्हीं के
ऊपर जल्द और गहरा असर होता है और वह थोड़ी सी अनु-
चित क्रिया करके भी सारी आयु के लिये बरबाद हो जाता है।
शोक की बात तो यह है कि स्त्री और पुरुष दोनो मे यह बुरी
आदत पड़ रही है।
मेरे पास हजारो स्त्रियां ऐसी आई और आ रही हैं कि
जिनके पति की अवस्था २०, २२ तथा २५ ही वर्ष की है परन्तु
वे नपुंसक हो गये हैं उन्होने विवाह होते ही नियम विरुद्ध