विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३३८ आनन्द मन्दिर
शारीरिक और मानसिक निर्बलता
की अधिकता
वीर्य की निर्बलता व वीर्य क्षीणता के कारण कमजोरी
आजकल एक जगत व्यापी रोग है इसका कारण यह है कि
नियम के विरुद्ध व बहुमैथुन आदि अत्याचार भी जगत व्यापी
हो रहे हैं। समस्त देश मे यह रोग फैला हुआ है, यह पापो में
सबसे बड़ा भारी पाप है और बुराइयो मे सबसे बड़ी बुराई है
किसी ने इस तरह बीमारी और असभ्यता नहीं फैलाई
जितनी इस दुष्ट आदत ने फैलगई है।
नियम विरुद्ध विषय करना स्त्री पुरुष का सबसे बढ़कर जबर्दस्त
शत्रु ( कुल्हाड़ा ) है जिसे मनुष्य अपने ही हाथों से अपने पाओं
पर मारते हैं, जिस किसी को जीते जी मुर्दा बनना हो, सुन्दरता,
लावण्यता, और आरोग्यता को अपने भीतर से दूर करना हो
और रोगी, कुरूप, सुस्त, तथा नपुंसक बनना हो उन्ही का यह
मित्र है। अपने हाथो से आप ही स्वयं सत्यानाश करने की
मिसाल इस पर ठीक आती है। स्पष्ट कहना यह है कि अपनी ही
गर्दन अपने हाथ की छुरी से काटनी है। इससे पठ्ठो की
कमजोरी, क्षयरोग, मिरगी ( अपस्मार ) अधरंग, मूर्छा,
उन्माद, पागलपन, आदि दुष्ट रोग आकर उस मनुष्य का
प्राणान्त करते हैं। आखो की कमजोरी, धातु का जाना, स्वप्नदोष
शीघ्रपतन, दर्द कमर, दिल की धड़कन, दिल व दिमाग आदि