विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४० आनन्द मन्दिर
प्रकृति विरुद्ध और अपनी शक्ति से वारह विषय किया है और जिन
बुरे कर्मों का फल उन्हे शीघ्र ही मिल गया। आप तो जीवन के
सन्तान सुख से हाथ धो ही बैठे और बेचारी निरपराध रूपवती
प्यारी स्त्रियां अब रो रो कर दिन बिता रही हैं।
एक स्त्री जिसकी अवस्था १८ वर्ष की थी वह अपने पति
के साथ मेरे पास अपना इलाज कराने आई, पति पत्नी दोनो
की दशा बहुत खराब थी। उस स्त्री की दशा देख कर नाड़ी
की परीक्षा की तो मालूम हुआ कि उसको प्रदर बहुत जोर पर
है। मैंने उससे कुछ गुप्त बातें पूछीं। उसने मुझसे कुछ भी नहीं
बतलाया शिर नीचा करके बैठी रही। तब मैंने उससे पूछा कि
अभी तक तुम्हारा इलाज किस रोग का होता था, उसने कहा
कि खांसी और ज्वर की हरारत का इलाज होता था। डाक्टर
लोग फेफड़े की खराबी और वैद्य पुराना बुखार बतलाते थे इसी
रोग का इलाज होता रहा। बुखार के लिये गरम गरम औषधियां
दी गईं जिससे प्रदर और भी बढ़ गया। शरीर अधिक कमजोर
हो गया। स्त्री को देखकर मैने उसके पति के पास अपना बनाया
एक रोगी फार्म भेजा और मैंने उस स्त्री को समझा दिया कि
तुम्हारे शरीर मे जो कुछ भी रोग है वह तुम्हारे पति के रोगों
का असर है। यदि तुम्हारे पति इस फार्म मे अपना पूरा हाल
ठीक ठीक न लिखेगे तो मैं इलाज न करूंगी। उस स्त्री ने पति
से यही बात कही तब उसने फार्म भरकर भेजा उसके फार्म
से मालूम हुआ कि उसका विवाह १६ वर्ष की अवस्था में