विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 360, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र २२६
[अलंकारिक रेखा]
हैं, कोई काम नियमानुसार नही करते और स्वास्थ्य जिनकी दृष्टि
में कुछ नहीं है, आहार, वस्त्र, नियमित व्यायाम, इत्यादि का
जिन्हें बिलकुल ख्याल नहीं है, जो हमेशा बहुमैथुन किया करते हैं।
उनकी खराबी का क्या पूछना, वे अपना नाश कर लेते हैं। जिनके
वास्ते कोई नियम नहीं हैं जैसे राजाओ नवावो आदि का कोई
दिन खाली ही नहीं जाता है, मगर उनका ध्यान इसी तरफ होता
है और वे हजारो रुपये बल लाभ करने के लिये खर्च भी करते
हैं। फिर भी उनकी शारीरिक दशा खराब ही रहा करती है।
जो पुरुष मैथुन का कुछ भी नियम न समझ कर अज्ञानता
वश अधिक विषय मे लवलीन रहते है उनका बल प्रति दिन
घटता जाता है परन्तु वे वीर्य को बढाने और पुष्ट करने वाले
पदार्थों का सेवन नही करते अथवा कम करते हैं इस प्रकार
वीर्य का खर्च तो अधिक करते हैं परन्तु इसके बढाने का कोई
उपाय नहीं करते । इस प्रकार वीर्य के क्षीण होने से वे कुछ दिनों
में शक्तिहीन होकर नपुसक होजाते हैं उनकी इन्द्रियां शिथिल
हो जाती है वे किसी कामके नही रहते ।
लिंगवृद्धिकरान्योगान् सेवते यः प्रमादतः ।
महता मेढ्रयोगेन चतुर्थी क्लीवतां व्रजेत् ॥
इसका अर्थ यह है कि जो अज्ञानी पुरुष मूर्खतावश नियम
के विरुद्ध और प्रकृति के विरुद्ध अपनी इन्द्री को बढ़ाने के लिये
औषधियों को काम में लाते हैं वे अज्ञानी पुरुष अपने हाथों
६