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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 359

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आनन्द मन्दिर
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वैद्यों से उसने सलाह ली उन सबने उसे रोगी बतलाया और कहा
कि तुम अपनी स्त्री से बच कर रहना नही तो तुम्हें भी कुछ दिनो
में बहुमूत्र रोग हो जावेगा। उसके पति ने स्त्री का इलाज तो कराया
नही, उसे मा के यहा भेज दिया। अपना इलाज कराता रहा, कुछ
आराम मालूम हुआ तभी उसने स्त्री को बुला लिया, बस कुपथ्य
होने लगा। कुछ दिनों में पति को भी बहुमूत्र होगया और दिन
दिन दशा बहुत ही खराब होती गई। इस प्रकार के सैकड़ों उदाहरण
मौजूद हैं। गर्मी, सुजाक, प्रमेह आदि जो पुरुष को होते हैं उसकी
स्त्री को अवश्य होते हैं। इस प्रकार की रोगी स्त्रियां तो प्रायः सदा
मेरे पास आया करती हैं जिनके पति से ही स्त्री को रोग मिला
है, सौ में पचीस ऐसी होती हैं कि जिनको अपने ही कारणों से
रोग हुआ है।
मासिकधर्म के दिनों मे असावधानी, कुपथ्य से, बालक
उत्पन्न होने के समय असावधानी से, और ऊ चा नीचा पैर पड़ने
अथवा भारी बोझ उठाने आदि कारणो से जो रोग होते हैं वे
स्त्री के ही कारण उसके शरीर मे उत्पन्न होते हैं।
जो पुरुष काम-वासनाओं मे फसे हुए हैं वे नियमों का
पालन नही कर सकते और जो लोग नियमानुसार जीवन व्यतीत
करते हैं, जिनका सिद्धान्त है कि “जीने के लिये खाओ न कि
खाने के लिये जीओ” जो व्यायाम करते हैं, स्वास्थ्य सम्बन्धी
नियमो का पालन करते हैं, जिन्हें शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान
होता है, वे प्रायःविषय भी नियमानुसार करते हैं। जो दुर्बल होते