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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 358

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २२७
भी स्त्री के रोगों के कारण रोगी होते हैं, स्त्री के रोगों की पुरुष
कुछ भी परवाह नहीं करते इसी कारण रोग बढ़ जाते हैं और
'रोगी स्त्री की दशा मरे तुल्य हो होती है।
गतवर्ष मेरे पास एक स्त्री प्रयाग की ही सन्तान के लिये
अपना इजाल कराने आई । उस स्त्री का पति सन्तान के लिये
अपना दूसरा विवाह करना चाहता था। वह मेरे पास आकर बड़ी
दु.खी होकर कहने लगी—यदि मेरें पति ने दूसरा विवाह कर
लिया तो मुझे बड़ा दु ख होगा। मैंने उसके रोग की दशा देखी
तो उसे सोमरोग (वहुमूत्र) था और रोग वहुत पुराना था। मैंने
उससे कहा—तुम्हारा रोग तो मै दूर कर दूंगी, तुम सन्तान
उत्पन्न करने के लायक हो जाओगी परन्तु यह रोग ऐसा है कि
तुम्हारे पति को भी तुम्हारे रोग के कारण प्रमेह मौजूद होगा,
यदि मेरी यह वात ठीक हो तो उनका भी इलाज किसी से कराना।
मैंने उस स्त्री को एक फार्म दिया कि तुम अपने पति से भराकर
लाओ। वह दूसरे दिन भराकर लाई तो उस फार्म से मालूम हुआ
कि उसके पति को भी बड़े जोर का असाध्य प्रमेह मौजूद
है। दोनो की यह दशा देखकर मैंने उससे कहा कि तुम्हारे पति
अपना दूसरा विवाह करके क्या करेगे, वे भी तो रोगी हैं। यदि
उन्होने अपना इलाज न किया तो कुछ दिनों में वे विवाह के
योग्य ही न रहेगे इसलिये तुम अपना इलाज तो कराओगी ही
अपने पति को भी किसी अच्छे वैद्य के पास भेजो। इस वात को
सुनकर उसके पति ने भी अपना इलाज शुरू किया। कई विद्वान