विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२६ आनन्द मन्दिर
होगा । हाय वड़ा शोक है ! सामर्थ्य तो ऐसी हो कि विना
सम्भन वटिका खाये मनोरथ पूरा न कर सके परन्तु मैथुन
प्रतिदिन एक वार से अधिक करने से भी वाज न आवे ।
मुझे यह सुनकर वड़ा दुःख होता है कि हमारे देश के मूर्ख
स्त्री पुरुषो में विषय लोलुपता इतनी अधिक वढ़ी हुई है कि शरीर
किसी दीन का न रहने पर भी, शरीर मे शक्ति न रहने पर भी,
अनेक रोगों मे ग्रसित होने पर भी अत्यधिक विषय मे लीन रहते हैं,
प्राय. रोगी स्त्रियां भी वहुधा लिखा करती हैं कि हमारे पति प्रति
दिन प्रसंग एक वार तो किया करते हैं दूसरी वार इच्छा नहीं
होती, कृपा करके कोई उत्तम वलवर्द्धक औषधि मेरी औषधि के
साथ ही पति के लिये भेजिये जिससे यह शिकायत दूर हो ।
प्यारी वहिनो ! यह कैसी भारी मूर्खता है कि तुम पति को
समझाती नही, तुम्हारे शरीर मे प्रदर, रक्त-विकार, कव्ज, भूख
का कम हो जाना, शिर दर्द, कमर की पीड़ा, गर्भाशय की
शिकायते आदि रोग तो मौजूद हैं परन्तु न पति को ही इसका
विचार है न तुम को ही इसका ध्यान है ।
वैद्यकशास्त्र वतलाता है कि योनि रोग वाली स्त्री से पुरुष
भी रोगी होजाता है और रोगी पुरुष से स्त्री रोगी होजाती है ।
यही कारण है कि जो स्त्रियां मेरे पास रोगी आती हैं मै उनके
पति का हाल पूछती हूँ तो पति उससे भी अधिक रोगी पाये
जाते हैं। जितनी स्त्रियाँ रोगी है उनमें से आधी से भी अधिक
पुरुषों के रोगों से रोगी पाई जाती हैं। इसीप्रकार कुछ पुरुष