विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 350, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र २२१
अनेक स्त्रियों का तो कहना है कि मासिक धर्म्म की दशा मे भी
पति जी संभोग करते ही हैं।
स्त्रियो मे जो अधिक विषय का दुःस्वभाव पड जाता है वह
पति की मूर्खता मे अथवा कुसंगति से और पूर्व जन्म के बुरे कर्म्मों
के फल से। वरन स्त्रियो की इच्छा सिवाय गर्भाधान के अधिक
विषय की इच्छा से जाग्रत नही होती है।
बहुतेरे पुरुषो को थोड़े से कारण से भी इच्छा होती
है। इच्छा ही नही पता लगाने से सैकड़ा पीछे पन्चानवे पुरुष
ऐसे मिलेगे कि जिन्हें स्त्री का स्पर्श करते ही और गन्दी पुस्तके
पढ़ते ही वीर्य बहने लगता है। मेरे पास पुरुष रोगियो के जितने
पत्र आते हैं अधिक मे ही यह शिकायत लिखी होती है कि स्त्री
का स्पर्श करते ही तथा इश्कवाजी के उपन्यास पढ़ते ही वीर्य
बहने लगता है और रात में स्वप्नदोष हो जाता हैं।
२५ पच्चीस वर्षों मे मेरे पास स्त्रियो की लाखो चिट्ठिया
आईं उनमें रोगी का पूरा हाल लिखा था तथा लिखा होता है
आज तक मैंने लाखो मे दो ही चार चिट्ठिया ऐसी पाईं जिनमे
स्त्रियो मे भी यह शिकायत थी कि गन्दी पुस्तके पढ़ने से रजस्राव
होने लगता है।
स्त्रियो के स्वभाव को बिगाड़ने वाले उनके पति ही होते हैं
पति चाहे जैसा पत्नी को बना सकता है। शास्त्रकारों का भी
यही कहना है कि जिस घरके पुरुष जिस आचरण के होंगे
स्त्रिया और बालक भी वैसे ही होंगे।