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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 346

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २१७
और पति को प्रमेह शीघ्रपात सिथिलता और गरमी सुजाक
आदि रोग है परन्तु वे औषधि सेवन करते समय तक ब्रह्मचर्य
से नहीं रह सकते ।
कोई कोई पुरुष तो लिखते हैं कि यदि मै प्रतिदिन सभोग
न करू ता स्वप्नदोष होजाता है इसलिये करना ही पड़ता है। स्त्रिया
जो यहा आकर अपने पति का हाल कहकर औषधियां लेजाती हैं
उनमे कुछ का यही कहना होता है कि यदि हमारे पति एक दिन
को भी ब्रह्मचर्य से रहे तो दूसरे दिन स्वप्नदोष होजाता है । स्वप्नदोष
से अधिक कमजोरी होजाती है और व्यर्थ होता है इसलिये वे
मानते नही, मना करने पर भी प्रतिदिन सभोग करते है ।
ऐसे अज्ञानी पुरुष शीघ्रही मनुष्य जीवन से हाथ धो बैठते
हैं और अपनी निरपराध स्त्रियो को सदैव के लिये दुःख भोगने
को छोड़ जाते हैं। यदि जीवित रहे तो पति पत्नी दोनो दुःखमय
जीवन व्यतीत करते हैं ।
जब से मैंने “स्त्री चिकित्सक” मासिक पत्र निकाला है उसमे
प्रतिमास उपरोक्त खराबियों और उनके उत्पन्न होने के कारण
प्रकाशित करना आरम्भ किये हैं तब से बीसो हजार स्त्री पुरुष
अधिक प्रसग की खराबियो को समझकर इससे बचने लगे हैं ।
पुरुषों का भ्रम
बहुतेरे पुरुषों की मेरे पास ऐसी चिट्ठियां औषधियों के लिये
आया करती है जिनमे वे लिखते है कि “ऐसी औषधि भेजिये कि