विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
DevanagariHindipublished704 पृष्ठ
पृष्ठ 345, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 345
२१६ आनन्द मन्दिर
के लिये औषधिया खाना और वीर्य दोष का उपाय न करना
यदि उपाय भी करना तो ब्रह्मचर्य से न रहना यह कितनी भारी
अज्ञानता है। इससे कभी लाभ नही होता।
मेरे पास प्राय विद्यार्थियों के स्त्रियो की चिट्ठियाँ औषधियो
के लिये आया करती है। औषधिया भेजकर जब मै उन्हे ब्रह्मचर्य
से रहने को लिखती हू तब वे औषधिया लौटा देने को तैय्यार होती
हैं और लिखती है कि महीने दो महीने मे जब कभी दो तीन
दिन की कालेज की छुट्टी होती है तब हमारे पति घर आते है ऐसी
दशा मे वे हमे ब्रह्मचर्य से कैसे रहने देगे। हाल मे ही दशहरा
दिवाली इत्यादि जो छुट्टी का समय हों, लिखती है कि आने
वाले हैं इस लियं आपकी औषधिया रक्खी रहेगी जब पति जी
कालेज की छुट्टी मे घर हो जावेगे तब आपकी औषधियां सेवन
करूंगी क्योकि पतिजी दो चार दिन को घर आवेगे और मैं
ब्रह्मचर्य लेकर बैठू तो वे क्या कहेगे और वे मानेगे भी नही।
उस प्रकार पुरुष रोगियो के भी पत्र आया करते हैं पुरुष
लिखते हैं कि आपकी औषधि मगाकर ले तो ली है परन्तु हमे पहिले
से यह बात मालूम न थी कि औषधिया सेवन करते समय तक
ब्रह्मचर्य से रहना पडेगा यह बात तो बड़ी कठिन मालूम होती है।
पाठको! अब बतलाइये स्त्री पुरुष रोगी न हो यह असम्भव
बात है। पति पत्नी दोनो रोगी हैं पत्नी को किसी को प्रदर,
किसी को प्रसूत, किसी को रजदोष, किसी को रक्त प्रदर, किसी
को हिस्ट्रिया, किसी को जीर्ण ज्वर, इत्यादि रोग तो मौजूद हैं