विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११४ आनन्द मन्दिर
पर न चलने से ही सैकडा पीछे निन्नानवे पुरुषो मे एक न एक
थोड़ा या बहुत रोग अवश्य होता है ।
आवश्यक सूचना
शास्त्रकारो ने वतलाया है कि विवाह के समय स्त्री की
अवस्था से पुरुष की अवस्था ड्योढी होनी चाहिये इसका उद्देश्य
यह है कि पुरुष की अवस्था अधिक और स्त्री की कम होने से
संभोग मे पुरुष की शक्ति क्षीण नही होती । पुरुष की शक्ति को
पुरुष से कम अवस्था वाली स्त्री खींच नही सकती । यदि स्त्री की
अवस्था पुरुष से अधिक हो तो अधिक अवस्था वाली स्त्री रति-
क्रिया के समय पुरुष की शक्ति को खीच लेती है इसका परिणाम
यह होता है कि पुरुष थोडे ही दिनो मे शक्तिहीन हो जाता है
और स्त्री वलवान है इस कारण उसके कन्याए ही अधिक
उत्पन्न होती हैं क्योकि पुरुष वलवान होने से पुत्र, और स्त्री
वलवान होने से कन्याएं उत्पन्न होती हैं ।
यदि कोई शका करें कि पुरुष की अवस्था अधिक और
स्त्री की कम होते हुए भी कन्याए अधिक होती हैं ? उसका कारण
यह है कि मासिकधर्म होने के वाद सम बिसम दिनों मे
गर्भाधान का विचार न रखने का यह कारण है । स्त्री पुरुषो
के वलावल के साथ समविसम रात्रियो का भी प्रभाव पडता है ।
इसीलिये आयुर्वेद और वेदो तथा धर्मशास्त्रों मे सव मे ही
स्त्री की अवस्था से पुरुष की ड्योढ़ी अवस्था विवाह के समय होनी