विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनारी महिमा ३
नारी महिमा
द्रष्टव्येषु किमुत्तमं मृगदृशां प्रेमप्रसन्नं मुखं।
घ्रातव्येष्वपि किं तदास्य पवनःश्राव्येषु किं तद्वचः॥
किं स्वाद्येषु तदोष्ठपल्लवरसः स्पृश्येषु किं तत्तनु-
र्ध्येयं किं नवयौवनं सुहृदयैः सर्वत्र तद्विभ्रमः ॥
मनुष्यो के देखने योग्य वस्तुओ मे उत्तम वस्तु क्या है ? मृग-
नयनी स्त्रियों का प्रेम से प्रसन्न वदन (मुख), सूंघने की वस्तु में
उनके मुख की भाफ, सुनने में मधुरवाणी, स्वादिष्ट वस्तु में उनके
अधर पल्लव (ओठो) का रस, स्पर्श की वस्तु मे उनका कोमल
शरीर और ध्यान करने के योग्य उनका यौवन और विलास है ।
स्वपर प्रतार कोऽसौ निन्दति,
योलीक पण्डितो युवतीः ।
यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्ग-
स्तस्यापि फलं तथाप्सरसः ॥
जो स्त्रियों की बुराई करता है वह झूठा पण्डित है, आप तो
ठगा ही गया, औरो को भी ठगाता है क्योकि तपस्या का फल
स्वर्ग है और स्वर्ग का फल स्त्री भोग है। अर्थात् स्वर्ग भोग से
भी बढ़कर आनन्द दायक पत्नी का प्रेम है ।