विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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सती और शिव का दाम्पत्य प्रेम
यदि स्त्री के प्रेम मे इतना प्रभाव न होता तो शिव और
श्रीकृष्ण आदि तक इसप्रकार स्त्री के प्रेम मे मग्न न होते। देवता
और बड़े वडे महर्षि तक स्त्रियों का आदर करते थे उनके प्रेम
वन्धन मे बंधे हुए थे। पढ़िये शिव जी के पत्नी मोह की कथा।
सती राजा दक्ष प्रजापतिकी कन्या थीं इनकी सुन्दरता
संसार मे विख्यात थी। सती का विवाह शिव जी के साथ हुआ
था, विवाह के पश्चात् सती कैलाशपति शिव जी के यहां आकर
बड़े आनन्द से रहने लगी।
यद्यपि शिवजी के यहां किसी बात की कमी न थी परन्तु
सती के शरीर पर गेरुए कपड़े और आभूषणों की जगह गले
में रुद्राक्ष की माला, हाथों में भी रुद्राक्ष के आभूषण
सौन्दर्य की शोभा बढा रहे थे। शिवजी और सती मे इतना अधिक
प्रेम था कि एक दूसरे से क्षण भर को भी अलग न होते थे।
एक बार सती के पिता ने बड़ा भारी यज्ञ किया जिसमे
भारत वर्ष भर के धनी निर्धन मूर्ख विद्वान सभी को निमंत्रण दिया
परन्तु अपनी प्यारी पुत्री सती और उनके पति शिवजी को
नहीं बुलाया। जब सती को यह बात नारद जी से मालूम हुई और
यज्ञ का दिन निकट आगया तब एक दिन सती ने अपने पति
शिवजी से पिता के यहाँ जाने की आज्ञा मांगी। शिवजी ने कहा
बिना बुलाए पिता के यहाँ किसी ऐसे उत्सव मे जाना उचित
नहीं है क्योकि उन्होंने समस्त देश के मनुष्यो को निमंत्रण भेजा