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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 33, कुल 704 में से

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पृष्ठ 33

३ भूमिका

जब जब कामदेव ने अपना उग्ररूप धारण किया तो
बड़े बड़े योगी और तपस्वी भी उसके वश मे हो गये साधारण
पुरुषो की क्या गिनती है। जो महात्मा विश्व को ब्रह्ममय देखते थे
वे उसे स्त्रीमय देखने लगे। कभी कभी कामदेव ने देवताओ तक
को वह कौतुक दिखलाया कि तमाम ससार काममय हो गया ।
इसमे जाना जासकता है कि—
जब ऐसे ऐसे बलवान् और ज्ञानवान् देवताओ तपस्वियों
महर्षियो और योगिराजो तथा विद्वानो तक को कामदेव ने नाच
नचा दिया और उन्हे स्त्रियो का दास बना दिया तो साधारण
मनुष्यो की क्या गिनती है।
स्त्रिया प्रत्यक्ष रति का स्वरूप और सृष्टि की उन्नति का
मूल कारण है, उन्ही के द्वारा मनुष्य मात्र की उत्पत्ति होती है
इसीलिये विधि ने उनमे सौन्दर्य की विशेषता रक्खी है। उनके
अंग अंग से लावण्यता और मोहकता टपकती है। उनमें वह
आकर्षण होता है जिसकी शक्ति चुम्बक से भी अधिक होती है।
स्त्रीमुद्रां झषकेतनस्य जननीं सर्वार्थसम्पत्करीं ।
येमूढाः प्रविहाययांति कुधियोमिथ्याफलान्वेषिणः ।
अर्थात् स्त्रियां कामदेव की मुद्रा है, वे सब अर्थ और सम्पत्ति
की करने वाली हैं जो मूढ़ कुबुद्धि उन्हे छोड़कर स्वर्गादि की इच्छा
से निकल भागते हैं वे मिथ्याफल के खोजने वाले हैं।
जिस नारी जाति को आज पुरुष उपेक्षा की दृष्टि से देखते
हैं उसकी महिमा शास्त्रकारों ने मुक्त कंठ से गाई है।