विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २११]
व्याधी खड़ी होगी। वे स्त्रियो को रोगी बना देते हैं। धिक्कार है ऐसे
मनुष्यत्व को, पशु पक्षी भी उचित समय पर रति सुख लेते हैं।
शोक है कितनेही विवाहित जोडे है जिनका, स्वास्थ्य भोग के
नियमो की अज्ञानता से वरवाद हो चुका है विना कुछ भी सोचे
विचारे वे अपनी मूर्खता और अज्ञानता से अपनी रुचियों की
बागडोर ढीली छोड़ देते हैं और पागलपन से दुख तथा शोक
की ओर दौड़े जाते हैं।
कोई कोई घमंडी लोग इस मूर्खता के कारण बहुमैथुन
करते हैं कि कही स्त्री यह न खयाल करे कि इसमें वल नहीं है।
वे मूर्ख यह नहीं जानते कि जब बहुमैथुन के कारण हम वेकाम
हो जावेंगे तो उस समय बिलकुल ही इच्छा पूरी न कर सकेंगे !
फिर क्या होगा !! यह लिखना जरूरी है कि स्त्री बहुमैथुन से
कभी प्रसन्न नहीं होती है, किन्तु बहुमैथुन से वह घृणा करती
है। नियम पूर्वक गर्भाधान होना ही स्त्री के लिये प्रसन्नता और
आनन्द की बात है और इसी मे अत्यन्त खुशी है। रोजाना
कोई स्त्री स्खलित होती ही नहीं, अगर हो तो थोडे काल मे
ही मुरदा होजाती है। इस विषय को विस्तार पूर्वक यहां लिखने
की आवश्यकता नहीं है। दोनो ही स्त्री पुरुष क्षय व राजदमा के
रोगी होजाते हैं। शरीर का सार वीर्य है। रुधिर की सौ बूदों के
समान वीर्य की एक बूद होती है यह बूद एक अनमोल मोती है
इससे शरीर उत्पन्न होता है इसको वरवाद करना अत्यन्त
मूर्खता का काम है।