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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 337

३१० आनन्द मन्दिर
बहु मैथुन
हमारे शास्त्रो मे लिखा है कि तरुण पुरुष और स्त्री का जब
विवाह हो और स्त्री रजोधर्म से शुद्ध हो तो पुरुष केवल एक
वार गर्भाधान करे और गर्भस्थित होने के पश्चात जब तक बालक
उत्पन्न होकर माता का दूध पीना न छोडे तब तक दोनो प्रसग
करने से बचे रहे। इस विधि से मानो ढाई वर्ष मे एक वार नौवत
पहुँचती है। खैर यह तो हुई धर्म्मशास्त्र की आज्ञा। मुझे अपने
पाठको को यह कर्णगोचर कराना है कि कितने दिनो के पीछे
गर्भाधान किया जाय जिसमे स्वास्थ्य मे कोई फर्क न पड़े। उपरोक्त
नियम बहुत उत्तम है परन्तु मनुष्यो की दशा आज कल बहुत
गिरी हुई है।
बहु मैथुन का परिणाम
बहु मैथुन इस प्रकार बढ़ा हुआ है कि जिसका वर्णन करना
असम्भव है। एक समय मैने एक पुरुष रोगी के पत्र को पढ़ कर
आश्चर्य किया उस पत्र मे लिखा था कि विवाह होते ही सात आठ
साल तक मैं लगातार २ से ६ बार तक प्रति दिन प्रसंग करता रहा।
इस दुष्कर्म ने भारतवासियों का सत्यानाश कर दिया है।
स्त्री के मासिक रजोधर्म के दिनो मे या बीमारी, प्रसूत के दिनो मे
भी अज्ञानी मूर्ख लोग स्त्री को चैन नही लेने देते, मुह काला
करते हैं और प्राय. रजस्वला की भी परवाह नही करते।
इसका भी सोच नही करते हैं कि इतने अधिक प्रसंग से महा