विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१० आनन्द मन्दिर
बहु मैथुन
हमारे शास्त्रो मे लिखा है कि तरुण पुरुष और स्त्री का जब
विवाह हो और स्त्री रजोधर्म से शुद्ध हो तो पुरुष केवल एक
वार गर्भाधान करे और गर्भस्थित होने के पश्चात जब तक बालक
उत्पन्न होकर माता का दूध पीना न छोडे तब तक दोनो प्रसग
करने से बचे रहे। इस विधि से मानो ढाई वर्ष मे एक वार नौवत
पहुँचती है। खैर यह तो हुई धर्म्मशास्त्र की आज्ञा। मुझे अपने
पाठको को यह कर्णगोचर कराना है कि कितने दिनो के पीछे
गर्भाधान किया जाय जिसमे स्वास्थ्य मे कोई फर्क न पड़े। उपरोक्त
नियम बहुत उत्तम है परन्तु मनुष्यो की दशा आज कल बहुत
गिरी हुई है।
बहु मैथुन का परिणाम
बहु मैथुन इस प्रकार बढ़ा हुआ है कि जिसका वर्णन करना
असम्भव है। एक समय मैने एक पुरुष रोगी के पत्र को पढ़ कर
आश्चर्य किया उस पत्र मे लिखा था कि विवाह होते ही सात आठ
साल तक मैं लगातार २ से ६ बार तक प्रति दिन प्रसंग करता रहा।
इस दुष्कर्म ने भारतवासियों का सत्यानाश कर दिया है।
स्त्री के मासिक रजोधर्म के दिनो मे या बीमारी, प्रसूत के दिनो मे
भी अज्ञानी मूर्ख लोग स्त्री को चैन नही लेने देते, मुह काला
करते हैं और प्राय. रजस्वला की भी परवाह नही करते।
इसका भी सोच नही करते हैं कि इतने अधिक प्रसंग से महा