सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 339, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 339

२१२ आनन्द मन्दिर
इससे रोगी की कमजोरी बराबर होते रहने से स्वास्थ्य को
हानि पहुचने वाले फल पैदा होते है । मैथुन का प्रभाव अवश्य
पट्ठो द्वारा दिमाग तक पहुँचता है और दुर्बल व्यक्ति प्राय
इस आघात से मर भी जाते है । खरगोश स्खलित होने के
पश्चात एक तरफ को गिर पडता है । मैथुन से बल नष्ट होता
है और पट्ठो को आघात पहुचता है। बहु मैथुन से शारीरिक और
आत्मिक बल ओज निकल जाते है इससे आप समझ सकते हैं
कि बहु मैथुन से कैसी हानि होती है, जीवन दायक रत्न का अधि-
कता से निकलते रहना ओर प्रसंग से पैदा हुये पट्ठो की कमजोरी
शरीर का नाश करने वाली है । प्राय सयम से रहने वाले स्त्री
पुरुष भी विवाह होते ही दैनिक मैथुन आरम्भ कर देते हैं और
उस समय तक करते हैं जब तक बीमारी उन्हे विवश नही
कर देती है । वे इलाज करवाते है । वैद्य उनके साधारण रोग का
इलाज करता है बहुमैथुन के विषय मे एक प्रश्न भी नहीं
पूछता और न रोकने के लिये सूचना देता है, रोग प्रतिदिन
बढ़ता ही जाता है । मन्दाग्नि पट्ठो की दुर्बलता, इत्यादि रोग
आराम नही होते है । यदि रोगी किसी ऐसे डाक्टर के पास
जावे जो उसको बता दे कि यह समस्त रोग बहुमैथुन के द्वारा
होगये है तो वह विस्मित होता है । मजबूत आदमी को पहले
पहल बडी भारी खराबी नही होती इस लिये वे समझते हैं कि
इसमे कोई हानि न होगी परन्तु शीघ्र नही तो कुछ दिनो मे
उसको इसका फल जरूर भुगतना पडता है ।