विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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जाय तो एक भारी ग्रंथ बनेगा और हर एक पढ़ने वाला एक
एक पत्र को पढ़ कर हैरान हो जायगा। एक नवयुवक की स्त्री मेरे
पास आई और उसने अपने पति का हाल मुझ से कहा । उसके
पति का रोगी फार्म देखकर मुझे मालूम हुआ कि वह २०
कदम भी न चल सकता था, चलने में श्वांस चढ़ने लगती थी
उसकी दुर्बलता इतनी बढ़ी हुई थी कि उसका जीना आश्चर्य
मालूम होता था। उसने बताया कि आठ वर्ष की आयु में विवाह
हुआ। १९ वर्ष की आयु में पक्षाघात हुआ। २२ साल की आयु में
‘फिर अधरंग ( पक्षाघात ) का आक्रमण हुआ। २६ साल में फिर
दौरा हुआ, पश्चात पेचिस आरम्भ हुई। २९ साल की आयु में
दिलकी धड़कन प्रारम्भ हुई और इस वक्त उसको श्वासरोग,
कलेजे की वृद्धि, मन्दाग्नि, पेट में भारीपन और दर्द जिगर, दर्द
कमर, गुर्दों की पिछली तरफ दर्द, पिंडलियों में दर्द, पेट में दर्द,
याद्दाश्त कमजोर, दुर्बलता इत्यादि रोग हैं।
आज कल ऐसा समय आगया है कि सैकड़ा पीछे ९० इसी
बुरी आदत के शिकार हैं, फिर क्यों न प्रत्येक व्यक्ति धातु पुष्टि
की औषधियां ढूंढ़ता फिरे। पुरुषों की इस प्रकार दुर्दशा के ही
कारण विज्ञापन बाजों की बन आई है। आजकल जिसे देखिए
वही नया औषधालय खोल कर धातु पुष्टि की दवाओं के नोटिस
देने लगते हैं और भोली भाली जनता को लूटते हैं। ऐसे नोटिस-
बाजों से जिन्हें वैद्यक का कुछ भी ज्ञान नहीं है, कभी कभी
बड़ा नुक्सान होता है।
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