विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०२ आनन्द मन्दिर
मनुष्य की नित्य प्रति की इच्छाएं
शरीरे जायते नित्यं वाञ्छा नृणां चतुर्विधा ।
बुभुक्षा च पिपासा च सुपुप्सा च रतिस्पृहा ॥
आयुर्वेद बतलाता है और प्रकृति का नियम है कि मनुष्यों
के शरीर मे भोजन करने की, पानी पीने की, सोने की और स्त्री
संभोग करने की इच्छा नित्य प्रति बनी रहती है । इन इच्छाओं
को रोकने से और नियम विरुद्ध अधिक उपभोग करने से शरीर
मे अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न होजाते हैं जिससे मनुष्य की
आयु क्षीण होती जाती है और ऐसे मनुष्य अकाल मे ही काल के
कलेवा हो जाते हैं।
भोजन की इच्छा रोकने से अर्थात् समय पर भोजन न
करने से शरीर टूटने लगता है, निर्बलता और दुर्बलता आघेरती
है, अरुचि उत्पन्न होती है थकान सी मालूम होती है सुस्ती आ
आजाती है, आंखे कमजोर होजाती है और बलका क्षय होता
है । इसी प्रकार से शरीर कमजोर होजाता है।
प्यास लगने पर पानी न पीने से कठ और मुख सूख जाता
है, खुश्की होती है, कानों को हानि पहुँचती है, रक्त सूखने लगता
है और हृदय मे पीडा होती है। आती हुई निद्रा को रोकने से
जम्भाई आने लगती है । शिर तथा नेत्र भारी हो जाते है शरीर
टूटने लगता है आलस्य उत्पन्न होता है और खाया हुआ अन्न