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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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१६४ आनन्द मन्दिर
अप्रसन्न रहती हो, ऐसी स्त्री से सभोग नही करना चाहिये ।
ऐसी स्त्री गर्भधारण नही कर सकती ।
स्त्रियों का स्वप्न प्रसंग
ऋतुस्नाता तु या नारी स्वप्नेमैथुनसावहेत ।
आर्तवंवायुरादाय स्वप्नेगर्भंकरोतिच ॥
मासि मासि विवर्द्धेत गर्भिण्यागर्भलक्षणम् ।
कललंजायतेतस्या वर्जितंपितृकैर्गुणैः ॥
आयुर्वेद और धर्म्मशास्त्र के मत से ऋतु से शुद्ध हुई
स्त्री मे पति को अवश्य गर्भाधान क्रिया नियम पूर्वक करनी ,
चाहिये क्योकि ऋतुस्नान से वारह रात्रि पर्यन्त स्त्री की प्रबल इच्छा
गर्भाधान के लिये पति संभोग की होती है यह प्रकृति का
नियम है। जो मूर्ख पति किसी कारण से इस नियत समय पर
पत्नी का निरादर करते, पत्नी से अलग रहते हैं उनकी पत्नियो
का क्या हाल होता है। यह ऊपर के श्लोक से पुष्ट होता है।
अर्थात् ऋतुस्नाता स्त्री की चौथे दिन से लेकर वारह रात्रि पर्यन्त
सम्भोग की इच्छा रहने के कारण यदि वह स्वप्न मे संभोग करे ,
तो वायु उस समय स्त्री के शुद्ध आर्तव को ही लेकर गर्भाशय
मे गर्भस्थापन करती है यह गर्भ भी महीने महीने असली गर्भ
की समान बढ़ता रहता है। जैसे लक्षण गर्भवती मे असली गर्भ