विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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की अवस्था से अधिक अवस्था वाली हो, जिसे सभोग की
इच्छा न हो, मैली हो, गर्भवती हो, इन स्त्रियो से सभोग नहीं
करना चाहिये । रोगवाली से तात्पर्य है “ऊपरी किसी प्रकार का
रोग हो” और योनि रोग से तात्पर्य है योनि मे किसी प्रकार
का रोग हो जैसे प्रदर, प्रसूत, गर्भाशय की खराबी, गरमी, सुजाक
आदि । प्रदर प्रसूत रोग वाली स्त्री से सभोग करने से स्त्री का
रोग अधिक बढ़ जाता है और गर्भ रह जाने पर सन्तान भी
निर्वल दुर्बल और रोगी होती है ।
गरमी सुजाक वाली स्त्री से सभोग करने से पुरुष के तुरंत
ये रोग उत्पन्न हो जाते हैं और जल्दी दूर नहीं होते । सन्तान
में भी ये खरावियां उत्पन्न होती हैं जो सहज ही कभी दूर नहीं
होती, कई पीढ़ियो तक रहती हैं । गरमी सुजाक का प्रभाव
सन्तान पर बहुत बुरा पड़ता है ।
तत्रात्यशिता क्षुधिता पिपासिता-
भीता विमनाः शोकार्त्ता क्रुद्धान्यञ्च ।
पुसांसमीच्छति मैथुने चाभिकामा-
न गर्भधत्ते विगुणां वा प्रजा जनयति ॥
जिसका पेट भोजन से भरा हो, जो भूखी हो, प्यासी हो,
भयभीत हो, मनमलीन हो अर्थात् सभोग के लिये प्रसन्न चित्त
न हो, जिसे किसी वात का शोक हो, क्रोध हो, जो पति से
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