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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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१६२ आनन्द मन्दिर
इसी प्रकार पशु नर जब गर्भ रह जाता है तब फिर उस
मादा के पास नही जाता इसी तरह पक्षियों मे भी है ।
प्रकृति का तो यही नियम है परन्तु मनुष्य ने सम्भोग के
महत्व को भुला दिया है । यही कारण है कि वर्षों संभोग करने
पर भी गर्भ नही रहता । ऐसे कडोरों घर होंगे जो सन्तान के
विना, विना दीपक वाले अधेरे घर की समान होरहे हैं ।
कामी और शक्तिहीन पुरुषो मे जिनके सन्तान होती भी
है वह रोगी और निर्बल दुर्बल कम आयुवाली होती हैं, ऐसे
बहुत थोड़े घर होगे जहा के पुरुष नियम पूर्वक चलकर उत्तम
सन्तान उत्पन्न करते हैं ।
पशु पक्षियो मे प्रकृति के नियमानुसार सन्तान के ही लिये
सम्भोग की इच्छा होती है इसी प्रकार मनुष्य में भी प्रकृति ने
यही नियम बनाया है परन्तु मनुष्य ने अपने चित्त प्रसन्नार्थ और
विषयाग्नि की शान्ति के लिये यह नियम तोड़ दिया है ।
संभोग के अयोग्य स्त्री
रजस्वलाव्याधिमती विशेषाद्योनिरोगिणी ।
वयोधिकानिष्कामा मलिनागर्भिणी तथा ॥
एतासंगमनात्पुंसां वैगुण्यानिभवन्तिह ।
इसका अर्थ यह है कि रजस्वला स्त्री, रोगी स्त्री, जिसे किसी
प्रकार का भी रोग हो, और योनि रोग वाली, जो स्त्री पुरुष