विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १६१
तभी तो कहना पड़ता है कि विषयी पुरुषों ने अपनी पत्नियो को
विषय वासना की तृप्ति करने की मशीन समझ रक्खा है इसी
लिये वे उनकी आरोग्यता और उत्तम सन्तान उत्पन्न करने का
कुछ भी ध्यान नही रखते।
पुरुषस्यगुणैर्युक्ता विहितान्यून भोजना ।
नारीऋतुमती पुंसा संगच्छेद्सुतार्थिनी ॥
अर्थात्—पुरुष की समान गुण युक्त यानी जिस प्रकार
पति स्नानकर चन्दन सुगन्ध फूलो की माला वस्त्र आभूषणो से
सजित हो स्त्री के पास जाने इच्छा करे उसी प्रकार स्त्री भी शृगार
कर थोड़ा भोजन करके पान खाकर ऋतु से शुद्ध हुई पति मे
जिसका अत्यन्त प्रेम हो और सम्भोग की प्रवल इच्छा हो ऐसी
स्त्री सन्तान की इच्छा से पति के पास जावे।
ऊपर के श्लोक से स्पष्ट होता है कि ऋतु मती होने पर ही
स्त्री का कामोद्दीपन होता है और सन्तान की इच्छा से ही सम्भोग
की इच्छा होती है। यह बात प्रकृति से भी स्पष्ट है क्योंकि पशु
पक्षियो, सबको ही गर्भाधान के ही लिये सम्भोग की इच्छा होती
है। गाय भैस वकरी इत्यादि सभी मादा पशु जब ऋतुमती होती
हैं तभी नर की इच्छा करती हैं और सम्भोग होते ही गर्भ रह
जाता है। फिर वह इच्छा नही करती यदि किसी कारण से गर्भ-
स्राव होजावे तो वह फिर नर की इच्छा करती है और सम्भोग
के बाद शांत होजाती है।