विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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१६० आनन्द मन्दिर
होते हैं। मेरे इस लिखने पर कोई सज्जन बुरा न मानें क्योंकि
मेरे पास ऐसे पुरुषों की पचासो चिट्ठियाँ और स्त्रियाँ आया
करती है और लाखों आचुकी है उन चिट्ठियों और स्त्रियो से जैसा
पता लगता है उसी अनुभव से मैंने यह सब हाल लिखने का
साहस किया है।
संभोग योग्य स्त्री
वैद्यक शास्त्र बतलाता है —
भार्यां रूपगुणोपेतां तुल्यशीलकुलोद्भवाम् ।
अभिकामोऽभिकामां तु हृष्टोहृष्टामलंकृताम् ॥
सेवेत प्रमदां युक्त्या वाजी करण वृंहितः ।
अर्थात्-रूप और गुणयुक्त समान स्वभाव और कुल मे तुल्य
दोनो के रमण की इच्छा वाली, पुरुष भी प्रसन्न चित्त हो और
स्त्री भी प्रसन्न चित्त वाली हो तथा श्रृंगार किये हो उस समय पुरुष
अपनी स्त्री से युक्ति के साथ अर्थात् नियमानुसार सभोग करे ।
पाठक विचार कर देखे कि हजारो मे एक ही दो ऐसे मिलेगे
जो इस प्रकार पत्नी की आरोग्यता का ध्यान रखकर सभोग
करते हो वरना अधिक सख्या ऐसो ही की मिलेगी जो केवल
विषय वासना की तृप्ति का ही ध्यान रखते है । आरोग्यता या
उत्तम सन्तान का कुछ भी नही । जब पति अपनी ही आरोग्यता
का ध्यान नही रखते तो पत्नी की आरोग्यता का कैसे हो ।