विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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स्त्रियों की संभोग इच्छा कब पूरी होती है
ऋतुस्नान के चौथे दिन गर्भाधान के लिये प्राकृतिक नियमा-
नुसार स्त्रियों की सम्भोग करने की प्रबल इच्छा होती है उसी
समय स्त्रियों की सम्भोग से इच्छा पूरी होती है । केश पकड़
कर खींचना नाखून गडाकर स्त्रियों के कामदेव को कुम्भकरण
की समान जगाना महा मूर्खता है । क्योंकि यदि पति आरोग्य
है तो उसे कुम्भकरणी उपायो की आवश्यकता नही है वह अपनी
पत्नी को वैसे ही तृप्त कर सकता है यदि पति रोगी है, स्त्री का
स्पर्श करते ही पतलून विगड़ जाती है तो एक नहीं हजार काम-
शास्त्र और कोकशास्त्र के उपाय किये जावे रोगी पति की स्त्री की
कभी तृप्ति नहीं होसकती ।
ऐसे पुरुष जो कि स्वयं वीर्य दोष, प्रमेह, सुस्ती, स्वप्नदोष,
शीघ्रपात आदि रोगों से ग्रसित हैं परन्तु सम्भोग करने की
प्रति दिन इच्छा रखते हैं और साथ ही स्त्री को भी स्खलित
करना चाहते हैं परन्तु स्त्री का स्पर्श करते ही पतलून या धोती
विगाड़ देते हैं। वे केवल अपनी पत्नी को यह दिखलाना चाहते
हैं कि हम वडे वहादुर हैं। स्त्री को स्खलित करने में ही पति
अपनी वीरता समझता है परन्तु जब स्त्री के पास जाते ही पत-
लून या वोती विगड़ जाती है उस समय नानी मरजाती है
लज्जित होकर रह जाना पडता है ।
ऐसे पुरुष न स्त्री को ही तृप्त कर सकते हैं न आपही तृप्त