विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 304, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र १८३
वे पुस्तकें कदापि सज्जन स्त्री पुरुष के हाथो में जाने योग्य नहीं
हैं। उनके प्रचार से स्त्री पुरुषों में और भी अधिक रोगो की
उत्पत्ति निर्बलता और दुर्बलता का प्रचार होगा। ऐसी पुस्तकों
ने विषयवासना और भी अधिक बढकर बालकों की भी रोगी
संख्या बढ़ने की आशंका है। विषय की अधिकता से ही सैकड़ा
पीछे निन्यानवे स्त्रियां रोगी पाई जाती हैं और पुरुषों की भी
रोगी संख्या स्त्रियों से कम नहीं है।
ऋतुकाल का परिमाण
ऋतुस्तु द्वादशनिशाः पूर्वास्तिस्रश्च निंदिताः ।
एकादशी च युग्मासुस्यात्पुत्रोऽन्यासुकन्यका ॥
अर्थात्—रजो दर्शन के दिन से बारह दिन तक ऋतुकाल
रहता है उनमे पहिली तीन रात्रि जिन में ऋतुधर्म्म का रक्त निक-
लता रहता है वे तीनों रात्रि वर्जित हैं। इनमें स्त्री के पास जाना
उचित नहीं है और ग्यारहवीं रात्रि भी मना है तथा तेरहवीं
रात्रि भी मना है। इनमें सम्भोग करने से यदि गर्भ रहे तो नपुं-
सक सन्तान की उत्पत्ति होती है। शेष दिनो मे अर्थात् चौथे,
छठे, आठवें, दसवे और बारहवें दिन सम्भोग करने से पुत्र की
उत्पत्ति होती है।
इन दिनों में स्त्री का आर्तव कम होजाता है इसलिये पुत्र
होता है और पांचवीं, सातवी, नवीं आदि विषम रात्रियों में