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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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१८४ आनन्द मन्दिर
सम्भोग करने से कन्या उत्पन्न होती है क्योंकि इन रात्रियों मे
आर्तव की अधिकता रहती है ।
यदि आहार आदि के कारण स्त्री का आर्तव ऊपर लिखी
सम विसम रात्रियो मे अधिक हो जावे और पुरुष का कम हो
जावे तो पुत्र हो तो स्त्री की आकृति और लक्षण वाला होता है
और कन्या हो तो पुरुष की आकृति और लक्षण वाली होती है ।
पुत्र कन्या जो कुछ भी हो निर्वल दुर्बल और हीनाङ्ग होती है ।
ऋतुकाल के पीछे संकोचन
पद्म संकोचमायाति दिनेऽतीते यथा तथा ।
ऋतावतीते योनिः साशुक्रं नातः प्रतीच्छति ॥
अर्थात्—दिन के समय खिला हुआ कमल का फूल जैसे
दिन के अन्त मे अर्थात् सायकाल को सकुचित हो जाता है
यानी सिकुड कर वन्द हो जाता है वैसे ही ऋतुकाल का समय
व्यतीत हो जाने अर्थात् रजोदर्शन के बारह दिन व्यतीत हो जाने
पर योनि अर्थात् गर्भाशय का मुख सिकुड़ जाता है बन्द हो
जाता है फिर वह वीर्य ग्रहण नही करता अर्थात् गर्भधारण
करने के योग्य नही रहता ।