सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 303, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 303

१८२ आनन्द मन्दिर
इसी कारण कोई भी पुस्तक आरोग्यता को साय में रखते हुये
नही बनी। यद्यपि बीच बीच में किसी ने धर्म की, किसी ने
आरोग्यता की दुहाई दी है परन्तु उस नाशकारी मनगढंत विषय
की खूब ही रचना की है, जिसमें किसी प्रकार का भी लाभ नहीं
हो सकता, हानि बहुत कुछ होरही है और होगी।
आजकल ऐसी पुस्तकों की रचना बहुत अधिक हो रही है।
जहां किसी पुस्तक विक्रेता ने यह सुन पाया कि अमुक पुस्तक
विक्रेता की अमुक पुस्तक खूब विकती है बस उसने भी इधर
उधर के मनगढंत विषय लिखकर और भी अधिक विषयी लोगों
के खुश करने के लिये नई पुस्तक बनाडाली ।
इनमे से अनेक पुस्तके तो ऐसी घृणित हैं कि इसको पढ़ना
सुनना भी पाप है इस विषय की पुस्तके यदि किसी अनुभवी
चिकित्सक ने बनाई होती तो वे रतिक्रिया (गर्भाधान विधि) के
सम्बन्ध मे आयुर्वेद ग्रन्थो से कुछ सहायता लेते और कदापि
ऐसी मनगढत बाते लिखने का साहस न करते। ऐसी व्यर्थ की
बातें लिखकर कामशास्त्र को भी बदनाम किया है, क्या कहा जाय,
किसी किसी पुस्तक मे यहाँ तक लिख दिया है कि इसकी शिक्षा
हर एक को मिलनी चाहिये।
जिन पुस्तकों मे पुस्तक-लेखको ने कामशास्त्र विषय में अपनी
ओर से पुस्तक की अधिक बिक्री की आशा से और विषयी
व्यभिचारी पुरुषों के प्रसन्नार्थ अपनी ओर से टीका टिप्पणी
लगा कर पुस्तक को विषयी पुरुषों के दिल पसन्द बना दिया है