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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 285, कुल 704 में से

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पृष्ठ 285

चिट्ठियों से अधिक हैं। स्त्रियां स्वयं मेरे पास आती हैं और पत्र
द्वारा औषधियां मंगाती हैं। पुरुष रोगी फार्म भेजते हैं। इस
प्रकार रोगी पुरुषो की रोग सख्या की अधिकता का मुझे २५
पच्चीस वर्षों का अनुभव है। इसलिए सम्भोग समय पर नियमित
ही करना चाहिए इधर उधर की लम्पटता और अनैसर्गिक
व्यभिचार आदि मे पडकर शरीर को नष्ट न करना चाहिए।
विवाह के पश्चात् उचित समय पर अपनी स्त्री से ही प्रसग
करना चाहिए।
सन्तान के लिये संभोग की तैयारी
स्नातश्चन्दनलिप्तांगः सुगन्ध सुमनोर्चितः ।
भुक्तपुष्पः सुवसनः सुवेशः समलंकृतः ॥
ताम्बूलवदनस्तस्यामनुरक्तोऽधिकस्मर ।
पुत्रार्थी पुरुषोनारिमुपेयाच्छ्रयने शुभे ॥
इसका अर्थ यह है कि पुरुष स्नान करके चन्दन लगाकर
इतर आदि सुगन्धित पदार्थों से अपने शरीर को सुगन्धित करके
भोजन कर सुगन्धित फूलो की माला आदि धारण कर सफेद्
स्वच्छ कपडो को पहन कर और पुरुषो के योग्य आभूषणों को
धारण कर पान खाकर अपनी प्यारी स्त्री में जिसके हृदय
में प्रेम हो और सभोग की प्रबल इच्छा से कामोद्दीपन हो ऐसा
पति पुत्र की इच्छा करके सुसज्जित सेजपर पत्नी के पास जावे।