सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 284, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 284

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १७१


कार्य नहीं होता और दिन पर दिन उनका शरीर निर्वल दुर्बल
हो संपूर्ण अच्छे कर्मों से घृणा हो जाती है, उपदंश, मूत्र-
कृच्छ्र (सुजाक) वाघी (वद्) आदि भयानक रोग उत्पन्न होते
हैं जिससे लोक परलोक दोनों मे दुःख ही दुःख भोगना पडता
है। इसलिये दुष्कर्मों से बचने के लिये सव से विनय पूर्वक
निवेदन करने का मैंने साहस किया है। आशा है इससे रोगी
निरोगी स्त्री पुरुष सव वड़ा भारी लाभ उठावेंगे।

उपरोक्त अस्वाभाविक कर्म्म लम्पट लोग तो करते ही हैं,
परन्तु अनैसर्गिक उपाय तो अधिकतर सभ्य कहलाने वाले
विद्यार्थियो, और नवयुवकों मे पाया जाता है। ससर्ग दोष से इस
की ऐसी अधिकता हो रही है कि शिशुकाल ही से इस दुष्कर्म
की शिक्षा पाकर प्राय. ८, ९ वर्ष से ही वालक वालिकाए बुरे कर्म
प्रारम्भ कर देते हैं। इस निन्दित कर्म से जवान होने के पहिले
ही शरीर वलहीन हो जाता है, अनेक रोग घर दवाते हैं
चलते हैं तो पैर कांपते हैं। स्मरण शक्ति घटते घटते पुरुषत्व
नाश हो जाता है, शारीरिक और मानसिक शक्ति विनष्ट हो
जाती है तव उनको पृथ्वी पर जड़ पदार्थवत् होकर जीवन
व्यतीत करना पड़ता है। विचार कर देखिये इसके बुरे अभ्यास
से क्या क्या हानि नही होती। मुझे लाखो स्त्रियो की चिकित्सा
कर उन्ही की जवानी उनके जवान पतियो का हाल मालूम
हुआ है।

पुरुषों की चिट्ठियो की सख्या भी कम नही है ⁷ स्त्रियो की