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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र १६७

शय संकुचित होजाता है। इसी कारण फिर वह गर्भधारण नहीं
कर सकती और संभोग की भी इच्छा नही करती। जब गर्भाशय
का मुख बन्द होजाता है तब पुरुष का वीर्य गर्भाशय के भीतर
नहीं जा सकता और स्त्री की इच्छा भी नहीं होती। बिना स्त्री
की इच्छा हुए गर्भ रहता ही नहीं।
उचित प्रसंग के लक्षण
जिस भोग के पश्चात आनंद आवे, शरीर मे स्फूर्ति और
नूतन शक्ति प्राप्त हो. शरीर अधिक फुरतीला और काम करने के
योग्य हो, व्यायाम या दिमागी मेहनत की अधिक रुचि हो।
लिंगेन्द्रिय मे थोडी देर पीछे शक्ति और उत्तेजना का अनुभव हो तो
यह समझना चाहिये कि सहवास स्वास्थ्य के नियमानुसार हुआ
है। यदि भोग क्रिया के पीछे थकान, शिर का भारी पन अनुभव
हो तो जान लेना चाहिये कि उचित सीमा उलघन की गई है।
क्यो साहब ? छाती पर हाथ रखकर सच्चे पन से बताइये तो
सही कि आपने इस नियम की पालना की है, फिर आपको सदा
औषधियो की आवश्यकता न रहे तो क्या हो ? दूसरा नियम
अधिकता जानने का यह भी है कि जब तक सच्ची रुचि न हो
सहवास न करे। सच्ची रुचि वह है जो बिना स्त्री के साथ हंसे
खेले, बिना किस्सा कहानियो के सुने, हृदय मे ऐसे विचारो को
बिना लाए अपने आप रुचि उत्पन्न हो और वह रुचि पति को
मैथुन की ओर प्रेरित करे।